शिफ्टिंग | पहले चरण के तहत जुलाई -अगस्त में 12 जलीय जीव तवा नदी में छोड़े जाएंगे 

भास्कर न्यूज | होशंगाबाद

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई स्थित लग्दा में चंबल के दुर्लभ घड़ियाल व डॉल्फिन को छोड़ा जाएगा। विशेषज्ञों द्वारा सर्वे करने के बाद इन जलीय जीवों को लग्दा में छोड़ने की सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है। अब बारिश के समय मुरैना से विशेषज्ञों का दल घड़ियाल व डॉल्फिन को शिफ्ट करने का काम शुरू कर देगा। पहले चरण में 12 घड़ियाल व डॉल्फिन छोड़े जाएंगे। इन जलीय जीवों के रहवास को कुछ समय देखने के बाद इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। संभवत: अक्टूबर में सतपुड़ा के गेट खुलने के बाद सैलानियों को तवा नदी के किनारों पर घड़ियाल- डॉल्फिन की चहल-कदमी देखने को मिल सकेगी। हालांकि कुछ समय तक इन जलीय जीवों को विशेष निगरानी में एक घेरे में रखा जाएगा। सतपुड़ा के पानी व वातावरण में रमने के बाद इन्हें खुले में छोड़ दिया जाएगा। रिजर्व संचालक आरपी सिंह ने बताया कि घड़ियाल व डॉल्फिन को सतपुड़ा में विस्थापित करने की सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। मढ़ई के लग्दा में जुलाई से अगस्त के बीच दोनों जलीय जीवों की शिफ्टिंग होगी। 

संरक्षित करने के लिए सतपुड़ा रिजर्व को चुना 

चंबल में नदियों का पानी खराब और पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए घड़ियाल व डॉल्फिन को दूसरी नदियों में विस्थापित कर प्रजाति को बचाने की कोशिश की जा रही है। तवा नदी को इसके लिए चुना गया है। इसी के तहत मार्च में चंबल के दुर्लभ घड़ियाल व डॉल्फिन सतपुड़ा में शिफ्ट करने का प्रस्ताव बना। दोनों जलीय जीव के लिए तवा डेम के किनारे देखने के लिए मुरैना से जलीय विशेषज्ञों की टीम ने मढ़ई का दौरा किया था। यहां लग्दा क्षेत्र में दोनों जलीय जीव को विस्थापित करने का निर्णय कुछ दिन पहले लिया गया है। 

कम बचे हैं घड़ियाल 

घड़ियालों के लिए काम करने वाली आईयूसीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार चंबल नेशनल सेंचुरी में घड़ियालों की संख्या 235 से 300 के बीच ही रह गई है। चंबल में नदियों में रेत बढ़ने, प्रदूषण, औद्योगिक कचरा, शिकार, भोजन आदि के कारण घड़ियालों की संख्या घट रही है। इसे देखते हुए घड़ियालों को बचाने का और दूसरे स्थानों पर बढ़ाने का काम किया जा रहा है। 

 

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Source: Dainik Bhasker (Dated 13 May 2015)