ट्रैफिक पुलिस की सख्त कार्रवाई और वाहनों की इंजीनियरिंग में हुए बदलाव का नतीजा 

राजधानीमें रात में ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम हो रहा है। रात 10 बजे के बाद डीजे साउंड पर प्रतिबंध, ट्रैफिक पुलिस की सख्ती और वाहनों की इंजीनियरिंग में हुए बदलाव के कारण यह संभव हुआ है। हालांकि अभी भी केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के मानकों के हिसाब से यह स्तर ज्यादा है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(एमपीपीसीबी) हर महीने शहर में प्रदूषण का स्तर चैक करता है। ध्वनि प्रदूषण को रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक मापा जाता है जबकि दिन के लिए यह समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक है। शहर में रात में सबसे कम शोर मई के महीने में अरेरा कॉलोनी स्थित पर्यावास परिसर पर 59.6 डेसिबल रिकॉर्ड किया गया। वहीं, सबसे ज्यादा शोर सितंबर में हमीदिया रोड स्थित मृगनयनी एम्पोरियम क्षेत्र में 81.9 डेसिबल रहा। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अनुसार रहवासी इलाकों में रात में ध्वनि का स्तर 45 डेसिबल और साइलेंस जोन में 40 डेसिबल होना चाहिए। डीएसपी ट्रैफिक महेंद्र जैन ने बताया कि रात में ध्वनि प्रदूषण करने वाले वाहनों पर पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई की है। प्रदूषण का स्तर लगातार कम हो, इसके लिए लोगों में जागरूकता बहुत जरूरी है।

 

एक तिहाई तक कम हुआ शोर

स्थान

तय सीमा

2014

2013

2012

2011

पर्यावासभवन, अरेरा कॉलोनी(रहवासी)

45

65.20

69.7

70

73.2 

मृगनयनी एम्पोरियम, हमीदिया रोड(कमर्शियल)

55

70.55

74

70.5

73.4 

ध्वनि के आंकड़े डेसिबल में

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Source: Dainik Bhasker (Dated 01 Feb 2015)