इस तकनीक से पौधरोपण करने पर 30 फीसदी से ज्यादा घने होते हैं वृक्ष, भूजल स्तर बढ़ता है 

भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल में जापान के वनस्पति विज्ञानी अकीरा मियावाकी की पौधरोपण तकनीक अपनाकर जंगल तैयार किया जाएगा। इससे तैयार जंगल या बगीचे सामान्य जंगल से 30 फीसदी अधिक घने होते हैं। इसका असर पर्यावरण के साथ भूजल स्तर पर भी पड़ता है। बेंगलुरू की कंपनी एफॉरेस्ट कंजर्वेशन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इसे प्रयोग के तौर पर शुरू किया जाएगा। 

एफॉरेस्ट कंपनी के डायरेक्टर शुभेंदु शर्मा ने बताया कि आईआईएफएम में स्टूडेंट काउंसिल से इस प्रोजेक्ट को शुरू करने की बात चल रही है। इसमें अलग-अलग ऊंचाई के विकसित होने वाले पौधों को आसपास लगाते हैं जैसे 30 फीट तक विकसित होने वाले पौधे के बाजू से 20 फीट तक विकसित होने वाला पौधा लगाते हैं। उन्होंने हाल ही आईआईएफएम की उद्ममिता सेल द्वारा आयोजित 'थिंक बिग थिंक लाउड टॉक सीरीज' में इस विषय पर अपनी बात रखी थी। 

पहले क्षेत्र का करते हैं सर्वे 

इस तकनीक से पौधे उगाने के लिए पहले मिट्टी का सर्वे और क्षेत्र की जैव विविधता का अध्ययन करते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार अलग-अलग खाद तैयार की जाती है। इसमें पौधे हर साल कम से कम 1 मीटर तक बढ़ते हैं। इसके अलावा तीन साल बाद इस तरह से तैयार जंगल का मेंटेनेंस भी नहीं करना पड़ता है। 

बगीचे में भी उपयोगी है तकनीक 

इसतकनीक से जंगल के साथ-साथ बगीचा भी तैयार किया जा सकता है। कम से कम एक हजार वर्ग फीट जगह में 50 प्रजाति के पौधे एक साथ रोपे जा सकते हैं। इसका फायदा पर्यावरण पर भी होता है, एक अध्ययन के अनुसार इस तरह से तैयार बगीचे या जंगल 30 प्रतिशत ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। 

देश में 14 स्थानों पर उगाया जंगल 

शुभेंदुने बताया कि अब तक देश में 14 स्थानों पर इस तकनीक से जंगल और बगीचे तैयार कर चुके हैं। इंदौर में 3 अलग-अलग स्थानों पर 50 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में उन्होंने बगीचे तैयार किए हैं।

To download click the below link



Source: Dainik Bhasker (Dated 01 Feb 2015)