वाइल्ड लाइफ रिसर्च एंड कंजरवेशन सोसायटी पुणे का सर्वे 

दो टाइगर रिजर्व को जोड़ने के लिए बनाए जा रहे सतपुड़ा-मेलघाट कॉरीडोर में पक्षियों की 175 प्रजातियां खोजी गई हैं। इनमें से एक दर्जन प्रजातियां लुप्तप्राय: हैं। खास बात यह है कि ये दुर्लभ पक्षी रिजर्व के अंदरूनी जंगल की बजाय सामान्य वन क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में देखे गए हैं। वन विभाग की कार्ययोजना शाखा वाइल्ड लाइफ रिसर्च एंड कंजरवेशन सोसायटी पुणे द्वारा पिछले एक साल में कॉरीडोर में पाए जाने वाले पक्षियों का सर्वे किया गया था। इसमें टीम को कुछ पक्षियों की मौजूदगी 100 साल बाद दिखाई दी। 


 सबसे अलग हैं ये पक्षी और इनकी पहचान 

 130 साल में दूसरी बार मिला दिन में देखने वाला उल्लू

चीन में मिलने वाली ब्लैक कैप्ड किंगफिशर ने बनाया ठिकाना  जितनी आकर्षक, उतनी ही आक्रामक ड्रांग्रो चिड़िया 

     
 बार्डजंगल ओलेट (जंगली उल्लू) 1884 के बाद पहली बार 1997 में खंडवा के जंगल में पूमेला रेसूमेसिया को दिखा था। इसके बाद दूसरी बार इसे हाल ही में कॉरीडोर क्षेत्र में बैतूल के पास देखा गया है। दूसरे उल्लुओं से बार्ड जंगल ओलेट का व्यवहार अलग है। यह दिन में शिकार करता है और रात को आराम करता है। यह सेंट्रल इंडिया और पश्चिमी घाट पर पाया जाता है।

चीन,कोरिया और उत्तर-पूर्वी भारत में पाई जाने वाली ब्लैक कैप्ड किंगफिशर लुप्तप्राय: पक्षियों की श्रेणी में आती हैं। लेकिन कॉरीडोर में यह स्थायी रूप से रह रही है। कॉरीडोर में किए गए सर्वे में सालभर इसकी मौजदूगी देखी गई है। ब्लैक कैप्ड किंगफिशर के पंख काले और नीले होते हैं। 28 सेमी लंबी चिड़िया की चोंच लंबी और गुलाबी होती है। 

 देशके पश्चिमी भाग में पाई जाने वाली रैकेट टेल्ड ड्रांग्रो की मौजूदगी भी क्षेत्र में देखी गई है। आक्रामक अंदाज वाली इस चिड़िया की आवाज भी तेज होती है। काले रंग और सिर पर कलगी वाली चिड़िया के पंख के पीछे एक झालर भी होती है। उड़ते समय यह बहुत सुंदर दिखाई देती है। इसके अलावा ओपन विल्ड स्टॉर्क, ईग्रेट, ब्लैक विंग स्टील भी मिले हैं।

खोज में उल्लू सबसे खास

वाइल्ड लाइफ रिसर्च एंड कंजरवेशन सोसायटी पुणे की सदस्य प्राची बताती हैं कॉरीडोर में हमें सबसे खास पक्षीबार्ड जंगल ओलेट मिला है। प्राची बताती हैं कि पक्षियों के बारे में खास तथ्य है कि जितना बड़ा पक्षीउसकीउतनी लंबी उम्र होती है। गौरेया जैसी अन्य छोटी चिड़िया 5 से 8 वर्षउल्लू 68, गिद्ध 52, कबूतर 22 से 35,मोर 20, बतख 13, चील 25 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं।

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Source: Dainik Bhasker (Dated 11 Jan 2015)