एमपी-यूपी राजस्थान की बनेगी गाइडलाइन, दुर्लभ जलीय जीवों के रहवासी क्षेत्र में बढ़ रही रेत को निकलवाएगा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय 

नेशनल चंबल सेंक्चुरी में पाली जा रही दुर्लभ प्रजाति की डॉल्फिन घड़ियालों को रहने के लिए गहरे पानी के पूल मिलें, वे वहां गहराई तक स्वच्छंद विचरण कर सकें, इसे लेकर तीन राज्यों की एक गाइड लाइन तैयार हो रही है। इसके लिए दिल्ली में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मध्यप्रदेश, राजस्थान उत्तरप्रदेश के वन मंत्रालय से सुझाव मांगे हैं। मुरैना का वन विभाग नदी में कुछ पूलों को गहरा करने के संबंध में अपना प्लान मध्यप्रदेश की ओर से केंद्र को भेजेगा। क्योंकि चंबल सेंक्चुरी का मुख्यालय मुरैना है। 

क्यों बना रहे हैं गाइड लाइन 

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य असल में मध्यप्रदेश, राजस्थान उत्तरप्रदेश की सीमा में फैला हुआ है। चंबल नदी मध्यप्रदेश के जानापाऊ पहाड़ से निकलकर राजस्थान के कोटा जिले में होती हुई फिर से मध्यप्रदेश में श्योपुर होकर आती है और मुरैना के क्षेत्र में पिनाहट पर उत्तरप्रदेश की सीमा में भी चलती है। इसलिए इस सेंक्चुरी का प्रबंधन तीनों ही राज्यों को संभालना होता है। ऐसे में इस चंबल सेंक्चुरी को लेकर तीनों राज्यों की एक कॉमन गाइड लाइन बनाने की खातिर यह काम हो रहा है। 

समस्या क्या रही है

चंबल नदी में पाली जा रही डाल्फिन घड़ियाल यहां मुरैना जिले में राजघाट, टिगरी-रिठौरा समेत दिमनी, अंबाह भिंड के अटेर, बरही घाटों के इलाके में ज्यादा निवास करते हैं, जबकि इन क्षेत्रों में चंबल में रेत की अधिकता होती जा रही है, जिसके कारण इन दुर्लभ जलीय जीवों को रहने में परेशानी होती है। नेचुरल वातावरण मिलने से ये जलीय जीव यहां बढ़ नहीं पा रहे हैं। इसलिए सरकार इस ओर नया काम कराने जा रही है। 

डॉल्फिन घड़ियाल को कम से कम 10 मीटर की गहराई का पानी वाला पूल चाहिए होता है। इससे अधिक हो तो और बेहतर है। ऐसे वातावरण में ये दोनों दुर्लभ जलीय जीव अच्छी तरह विचरण करते हैं। -डॉ.ऋषिकेशशर्मा, (जलीयजीव विशेषज्ञ) रेंजर, वन विभाग, मुरैना 

नेशनल चंबल सेंक्चुरी की कॉमन गाइड लाइन के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मध्यप्रदेश, राजस्थान उत्तरप्रदेश से सुझाव मांगे हैं, क्योंकि डॉल्फिन-घड़ियाल के पूलों को गहरा करना है। उसमें से डिपाजिट रेत हटाना है। इसके लिए हम अपना प्लान सौंपने वाले हैं।' -विंसेंटरहीम, डीएफओजिला, मुरैना 

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Source: Dainik Bhasker (Dated 05 Jan 2015)