भोपाल। प्रदेश में बाघों की सुरक्षा को लेकर सरकार चाहे कितने दावे करे लेकिन हकीकत यही है कि प्रदेश बाघों की कब्रगाह ही बनता जा रहा है। वर्ष 2014 में यानी इसी साल अब तक प्रदेश में कुल 14 बाघों ने दम तोड़ा है। इनमें से केवल कुछ की ही स्वभाविक मृत्यु हुई जबकि अधिकांश के मामलों में शिकार ही पहला कारण सामने आता रहा है। सरकार इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है कि प्रदेश में बाघों का शिकार हो रहा है। यह खुलासा राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की वर्ष-2014 की जारी रिपोर्ट में हुआ है। एनटीसीए द्वारा देश में 2014 में हुई बाघों की मौत के आंकडे जारी किए गए हैं। एनटीसीए की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में कुल 60 बाघों की मौत स्वभाविक मृत्यु और आपसी लड़ाई से होना बताया गया है।

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Source: Peoples Samachar (Dated 24 Nov 2014)