भोपाल। राजधानी की जीवन रेखा मानी जाने वाली झीलें प्रदूषण के कारण दम तोड़ती जा रही हैं। इन झीलों के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में जनहित याचिकाएं भी लगी हैं। इसके बावजूद भी प्रदूषण पर रोक नहीं है। शहर में जितने भी तालाब हैं लगभग सभी प्रदूषण की चपेट में हैं। तालाबों को साफ करने उनमें मिलने वाले सीवेज के प्रदूषित पानी को रोकने के लिए सरकार प्रशासन द्वारा कई कदम उठाए गए, लेकिन उनसे तालाबों का जीवन नहीं संवर सका। बंद है ट्रीटमेंट प्लांट तालाबों में सीवेज का पानी पहुंचाने वाले मैरिज गार्डनों पर नगर निगम प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। सीवेज लाइन, सफाई, पार्किंग एवं अन्य व्यवस्था रखने के लिए एनजीटी द्वारा निर्देश दिए जा चुके हैं। एनजीटी ने नगर निगम प्रशासन को निर्देशित किया था कि सीवेज का पानी तालाबों में मिलने से रोकने बंद ट्रीटमेंट प्लांटों को कैसे चालू किया जाएगा इस संबंध में रिपोर्ट दें, लेकिन अभी तक एनजीटी के पास रिपोर्ट नहीं पहुंची है।

इन झीलों को बचाने एनजीटी में याचिका

बड़ा तालाब : एनजीटी ने कहा है कि 300 मीटर के दायरे को ग्रीन किया जाए और निर्माण पर रोक के साथ अवैध निर्माम को तोड़ा जाए, लेकिन अभी तक एनजीटी के निर्देशों पर अमल नहीं हुआ है। पुन: एनजीटी में मामला लंबित है।

सिद्धिकी हसन तालाब : तालाब में मिलने वाले सीवेज को रोकने, अवैध बने घरों को तोड़ने तालाब के चारों तरफ ग्रीन करने के लिए कहा गया था, पर जिम्मेदार विभाग ने ठोस कार्रवाई नहीं की, एनजीटी में मामला लंबित।

लहारपुर डेम : डेम को साफ करने सीवेज पानी को साफ करने ट्रीटमेंट प्लांट लागने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ। एनजीटी में मामला लंबित।

छोटा तालाब : पूरे तालाब की सही तरीके से सफाई, चारों तरफ ग्रीन प्लांटेशन करने एवं 300 मीटर के दायरे में निर्माण पर रोक। काली माता मंदिर घाट पर पूजा सामग्री सीधे तौर पर डालने के लिए कहा गया था, पर कुछ नहीं हुआ। एनजीटी में याचिका लंबित।

शाहपुरा तालाब : करीब 25 अवैध मकानों को हटाने के निर्देश एनजीटी ने दिए थे, इसके अलावा तालाब में मिलने वाले सीवेज को रोकने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन प्रशासन द्वारा सही तरीके से कार्य नहीं किया गया। एनजीटी में डीपीआर की रिपोर्ट सम्मिट हो गई है।

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Source: Peoples Samachar (Dated 19 Oct 2014)