केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट में किया गया खुलासा 

भोपालगैस त्रासदी के 30 साल से ज्यादा समय के बाद भी यूनियन कार्बाइड कारखाना के गोदाम में रखे जहरीले कचरे में तमाम कीटनाशक रसायन और लेड, मर्करी, आर्सेनिक मौजूद हैं। कचरे में मौजूद रसायनों और कीटनाशकों का असर अभी कम नहीं हुआ है। यह खुलासा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने कारखाना गोदाम में रखे जहरीले कचरे की जांच रिपोर्ट में किया है। बोर्ड ने मंगलवार को यह रिपोर्ट यूनियन कार्बाइड जहरीली गैस रिसाव जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एसएल कोचर को सौंपी। 
आयोग के सचिव शशि मोहन श्रीवास्तव ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि कारखाने में रखे कचरे को खुले में नहीं रखा जा सकता। कचरे में मौजूद कीटनाशक को खुले में नष्ट करने पर मिट्टी प्रदूषित होगी। रिपोर्ट में बोर्ड ने कचरे का निपटान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के तहत कराने की सिफारिश की है। इसके अलावा कारखाना परिसर की मिट्टी में जहरीले रसायन तय मानकों के तहत होने की बात कही है। बोर्ड वैज्ञानिकों ने यह नमूने करीब दो सप्ताह पहले आयोग अध्यक्ष जस्टिस एसएल कोचर के निर्देश पर लिए थे। 

बोर्ड ने यूका के पानी की नहीं की जांच 

आयोगके सचिव ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यूनियन कार्बाइड कारखाना परिसर के भूजल की जांच करने के निर्देश 14 अगस्त को दिए थे। बोर्ड के वैज्ञानिकों ने कारखाना स्थित ट्यूबवेल के स्थाई रूप से बंद होने के कारण भूजल का नमूना नहीं लिए जाने के कारण जांच होने की जानकारी दी है। इस कारण कारखाना परिसर में फैले और गोदाम में रखे जहरीले कचरे से हुए भूजल प्रदूषण का पता नहीं लगाया जा सका है। 

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Source: Dainik Bhasker (Dated 24 Sep 2014)