भोपाल। प्रदेश भर के टाइगर रिजर्व में करंट से चार बाघों की मौत के बाद अब सरकार की नींद खुली है। वनमंत्री ने प्रदेश के संरक्षित और असंरक्षित वन क्षेत्रों से गुजरने वाली बिजली लाइनों को इंसुलेटेड वायर में तब्दील करने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही वनमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बाघ के मूवमेंट वाले इलाकों को चिंह्नित कर चौकसी बढ़ाई जाए। वर्ष 2009 में वन्य प्राणियों की सुरक्षा के मद्देनजर वन विभाग ने जंगलों से गुजरने वाली बिजली लाइनों को इंसुलेटेड तार में बदलने का प्रस्ताव तैयार किया था। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए केंद्र में अटका हुआ है।

एक हजार करोड़ से ज्यादा होंगे खर्च

पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ नरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रदेश के संरक्षित एवं वन क्षेत्रों से गुजरने वाली बिजली लाइनों को इंसुलेटेड तार में बदलने के लिए करीब एक हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। तारों को इंसुलेटेड करने के बाद बाघों की करंट से हो रही मौत पर अंकुश लगाया जा सकेगा। वनमंत्री ने बताया कि 2009 में प्रदेश के संरक्षित एवं असंरक्षित वन क्षेत्रों से गुजरने वाली बिजली लाइनों को इंसुलेटेड करने के लिए प्रस्ताव तैयार करवाया था। इसमें करीब 1200 करोड़ खर्च होने की बात कही गई थी। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव को केंद्र के पास बजट आवंटन के लिए भेजा गया था। तब से अब तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस संबंध में जल्द ही केंद्र सरकार से मदद लेकर तारों को इंसुलेटेड करवाया जाएगा।

मूवमेंट वाले स्थान होंगे चिन्हित

संरक्षित एवं असंरक्षित क्षेत्रों में बाघों के मूवमेंट वाले स्थानों को चिंह्नित किया जाएगा। वन मंत्री ने बताया कि जिस स्थान पर बाघों की मूवमेंट हो रही है, वहां गश्तीदल की चौकसी बढ़ाई जाएगी। करंट से अब किसी बाघ की मौत हो, इसके लिए अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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Source: Peoples Samachar (Dated 10 Oct 2014)