भोपाल। देश में जैसे-जैसे जनसंख्या का दबाव बढ़ रहा है वैसे-वैसे ही भू-जल भी प्रदूषित हो रहा है। भू-गर्भीय स्त्रों का जितना ज्यादा उयोग हुआ है उससे कई गुना प्रयोग कृषि औद्यौगिक कार्यो के लिए हुआ है, जिसके कारण भू- जल स्तर में गिरावट आई है और इसके परिणाम यह हैं कि जमीन के अंदर भू- जल तेजी से नीचे गया है और प्रदूषित हुआ है। जमीन के गहराई से जल का दोहन करने के कारण फ्लोराईड, नाईट्रेट, नाईट्राईट एवं आजयरन जैसे प्रदूषक तत्व जल में तेजी से पाए गए हैं। मप्र में 27 जिलें ऐसे हैं जहां पर पिछले 40 सालों से ज्यादा भू-जल प्रदूषित हुआ है। यह बात शनिवार को जल की गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती पर आयोजित सेमिनार में इंडियन वाटर वार्कस एसोसिएसन भोपाल ईकाई के अध्यक्ष डीएस दामोर ने कहीं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुछ जिलें ऐसे हैं जहां पर पेयजल की गुणवत्ता तेजी से प्रभावित पाई गई है। कार्यक्रम में देशभर से दो दर्जन से ज्यादा जल विशेषज्ञ शामिल हुए और महत्वपूर्ण जानकारी दिए।

इन जिलों का भू-जल प्रदूषित

अलीराजपुर, बालाघाट, बैतूल, छिंदवाड़ा, दतिया, देवास, धार, डिंडोरी, गुना, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, झाबुआ, खरगौन, मंडला, मुरैना, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सागर, सीहोर, शिवनी, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन एवं विदिशा।

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Source: Peoples Samachar (Dated 12 Oct 2014)