16 सितंबर : ओजोन संरक्षण दिवस 

पृथ्वी के वातावरण और प्राणियों को सुरक्षा कवच प्रदान करने वाली ओजोन परत के संरक्षण के लिए हर साल 16 सितंबर को 'अंतर्राष्ट्रीय ओजोन संरक्षण दिवस' मनाया जाता है। दिसंबर 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ओजोन परत के घटते आकार पर चिंता जाहिर की थी। तब यह तय किया गया था कि हर साल ऐसा कोई दिन होना चाहिए, जिससे पूरी दुनिया को ओजोन परत के घटने की जानकारी मिलती रहे और इसे बचाने के लिए सभी देश मिल-जुलकर प्रयास करें। 19 दिसंबर को महासभा में एक प्रस्ताव रखा गया, जिसमें 16 सितंबर को यह दिवस मनाने की बात शामिल थी। उसके बाद प्रस्ताव पर मतदान हुआ और 49/114 मतों से उसे पारित कर दिया गया। तब से हर साल 16 सितंबर को 'ओजोन संरक्षण दिवस' मनाया जा रहा है। इसके पहले 1987 में कई देशों ने ओजोन परत बचाने की वचनबद्धता के साथ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए थे। उसके सम्मान में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव लाया गया था। 

फ्रेमवर्कके बाद आया सुधार

ओजोनपरत प्राकृतिक रूप से बनने वाली गैसों की वह परत है, जो पृथ्वी से 10 से 50 किलोमीटर ऊपर वातावरण में है। यह पृथ्वी के प्रत्येक प्राणी को सूरज से निकलने वाली खतरनाक पराबैंगनी (अल्ट्रा वॉयलेट) किरणों से बचाती है। 1970 के दशक में गहन खोज के बाद वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया था कि ओजोन परत की मोटाई केवल घट रही है, बल्कि इसमें छेद बन रहा है। इसके बाद 1985 में सभी देशों के प्रतिनिधि विएना में एकत्र हुए और ओजोन परत को बचाने के लिए फ्रेमवर्क बनाकर कार्य करने पर सहमति बनी। 

चुनौतियों का सामना करना बाकी 

संयुक्त प्रयासों, लगातार बैठकों और सख्त कदम उठाने से यह लाभ हुआ कि ओजोन परत में अब तेजी से सुधार हो रहा है। उसकेबीच में जो छेद बढ़ रहा था, उसमें कमी रहा है। यह अनुमान है कि इस सदी के मध्य तक ओजोन परत पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि अभी कई चुनौतियों का सामना करना बाकी है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और विएना सम्मेलन का नतीजा यह निकला कि आज प्रत्येक देश इसके प्रति जागरूक है और ओजोन परत बचाने की दिशा में हरसंभव प्रयास भी कर रहा है। 

कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर घटाना जरूरी 

पृथ्वी से 10-50 किलोमीटर ऊपर ओजोन परत की शुरुआत होती है। यह प्राकृतिक गैसों का वह समूह है, जो सूरज से निकलने वाले खतरनाक रेडिएशन से हमारी रक्षा करती है। धरती के वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण ओजोन परत को क्षति पहुंच रही है। इसके बचाने के लिए कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर घटाने के प्रयास करने के साथ ही पेड़ों को बचाकर, नए पौधे लगाकर हरियाली को बढ़ाना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो सूरज की खतरनाक किरणें पृथ्वी के प्राणियों के लिए जानलेवा हो जाएंगी और पृथ्वी बहुत समय तक नहीं बच पाएगी। पृथ्वी पर जितनी अधिक हरियाली होगी, उतनी ज्यादा कार्बन डाईऑक्साइड गैस घटेगी और प्राकृतिक गैसों का स्तर बढ़ेगा, जिससे ओजोन परत मजबूत होगी।

इस वर्ष थीम पर काम कर रहा संयुक्त राष्ट्र 

इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने इसकी थीम 'ओजोन लेयर प्रोटेक्शन : दि मिशन गोज ऑन' रखी है। इसमें यह संदेश है कि ओजोन परत बचाने के लिए सभी देशों को अपने स्तर पर किए जा रहे प्रयासों में बढ़ोतरी करनी है और दृढ़ता दिखानी है, जिससे कि चुनौती का सामना किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र में ओजोन सचिवालय भी है, जहां प्रत्येक देश को अपनी एक्शन रिपोर्ट और प्लान की जानकारी देनी होती है। इस वर्ष भी रिपोर्ट दी जानी है, जिससे पता चलेगा कि कौन-सा देश ज्यादा जागरूक है और उसने कितने अधिक प्रयास किए हैं। 

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Source: Dainik Bhasker (Dated 16 Sep 2014)