आज इंटरनेशनल मदर अर्थ-डे है। इस बार की थीम है - ग्रीन सिटीज। शहरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। प्रदूषण भी बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए दुनियाभर के शहरों में हरियाली बचाने के जतन किए जा रहे हैं। 

भोपाल को भी ग्रीन सिटी बनाने की कोशिश तो खूब हुई। लेकिन ज्यादातर कागजी। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश (27.51 प्रतिशत) में फॉरेस्ट कवर देश में सबसे ज्यादा है। लेकिन भोपाल राज्य में काफी पीछे है। इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर से भी पीछे। जिले के सिर्फ 13.20 प्रतिशत हिस्से में फॉरेस्ट कवर है। सबसे कम फॉरेस्ट कवर वाले जिलों में टॉप 10 में है भोपाल। प्रदेश में सबसे ज्यादा फॉरेस्ट कवर बालाघाट में 54.14 प्रतिशत है। उसके बाद श्योपुर (53.30 प्रतिशत), उमरिया (49.90 प्रतिशत), मंडला (48.79 प्रतिशत) का नंबर है। 

ये लेना होगा संकल्प 

यूएन के मुताबिक शहरों में हरियाली बढ़ाने के लिए जागरुकता जरूरी है। हर व्यक्ति को एक साल में कम से कम एक पौधा जरूर लगाना होगा। पौधा लगाने से काम नहीं चलेगा, उसकी देखभाल भी करनी होगी। ज्यादा से ज्यादा कचरे को रिसाइकिल करना होगा। पॉलीथीन की जगह रिसाइकल्ड कागज या कपड़े की थैले का इस्तेमाल करना होगा। साथ ही प्रदूषण कम करने के लिए बिजली, पेट्रोल-डीजल की बचत करनी होगी। 

क्या है अर्थ-डे 

21 मार्च 1970 को पहला अर्थ-डे मनाया गया था। एक महीने बाद अमेरिका में 22 अप्रैल को दूसरा अर्थ-डे मनाया गया। 1990 के बाद पूरी दुनिया में यह अर्थ-डे मनाया जाने लगा। 2009 में अर्थ-डे का नाम बदलकर 'इंटरनेशनल मदर अर्थ-डे' रखा गया। 

ग्रीन सिटीज क्यों? 

इंटरनेशनल मदर अर्थ-डे की इस बार की थीम है - ग्रीन सिटीज। यूएन के मुताबिक- दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी शहरों में है। आबादी बढऩे से शहरों पर दबाव बढ़ा है। प्रदूषण बढ़ा है। इसके लिए पौधे लगाकर शहरों में हरियाली लाने की जरूरत है। 

प्रदेश के महानगरों में फॉरेस्ट कवर 

ग्वालियर            26.16 
जबलपुर             22.45 
इंदौर                 18.11 
भोपाल               13.20 
(
आंकड़े प्रतिशत में)

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Source: Dainik Bhasker (Dated 22 Apr 2014)