कटनी। शहर की नदियों व उनका जल स्तर गर्मी बढ़ने के साथ कम होता नजर आ रहा है कटनी नदी व उसकी सहायक नदियों में भी लगातार जल स्तर कम हो रहा है। वही कटनी नदी और उसकी सहायक नदियों में साफ-सफाई नहीं होने से नदियों का जल लगातार दूषित होता जा रहा नदियों में पालीथिन, एक्सपायरी डेट की दवाईया व अन्य कचरा फेंकने से लगातार नदियों का जल दूषित होता जा रहा है।

गौरतलब है कि कई शहर में कटनी नदी व उसकी सहायक नदियों का जल लोग नहाने, कपड़े धोने व कही-कही यह जल पीने के इस्तेमाल के साथ ही गर्मी के दिनों में खेतों की सिचाई के लिए भी इस्तेमाल होता है ऐसे में नदियों में लगातार फेंका जा रहा कचरे व अन्य सामग्री से कटनी नदी व उसकी सहायक नदियों का जल दूषित हो रहा है।

शहर से कुछ दूरी पर स्थित बायपास नदी में अधिकाशतः काई व इसमें अन्य केमिकल बहाने से नदी का पानी लगातार दूषित हो रहा है इस नदी के पानी के पानी का इस्तेमाल लोग फसलों की सिचाई व अन्य दैनिक कार्यो में करते है। रपटा नदी में बहाया जाता है कचरा पासपास के पास ही स्थित रपटा नदी जिसका जल स्तर वर्तमान में ना के बाराबार है पर यह नदी कटनी नदी की सहायक नदियों में से एक है इस नदी में लगातार कचरा व तीज त्याहारों में विसर्जित की गई सामग्री जस की तस नदी में ही पड़ी रहती है। इसके साथ ही लोग कचरा व अन्य सामग्री भी नदी में प्रवाहित कर देते है जिससे लगातार पानी दूषित हो रहा है।

खिरहनी ओवर ब्रिज से खिरहनी एण्ड की ओर रास्ते में पड़ने वाली माई नदी की दुदर्शा कई वर्षो से खराब है। नदी कई वर्ष पहले घाट तो बना दिया गया पर घाट की साफ सफाई व नदी में कचरे फेंकने पर रोक नहीं लगाई जा सकी जिसके चलते नदी में अलग-अलग हिस्सों में जहां से नदी गुजरती है लोगों द्वारा फेंका जाने वाला कचरा व विसर्जन सामग्री कई सालों से इक्कठी हो रही है व नदी का जल स्तर लगातार कम होता जा रहा है।

वही नदी में एक घाट के उपरी हिस्से में एक नाले का पानी जो लगातार नदी में जाता है उसे बंद नहीं किया गया है। जिससे नदी का जल लगातार दूषित हो रहा है। जिससे पानी से बीमारी का खतरा बना रहता है। शहर की प्रमुख नदियों में से एक कटाए घाट नदी में भी यही हालात लोग विसर्जन सामग्री के साथ ही पालीथिन आदि समाग्री नदी में फेंक कर चले जाते है। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले केमिकल आदि कटाए घाट नदी केअन्य हिस्सों में फेंक दिए जाते है। इससे नदी प्रदूषित होती है।

शहर की प्रमुख नदियों के साथ ही मुख्य नदियों में कभी सफाई कार्य नही किया जाता है जिस कारण लगातार नदियों का जल दूषित हो रहा है। न ही इस संबंध में को विशेष इंतजाम किए जाते हैं जिससे की यहां की सफाई व्यवस्था दुरस्त रहे।

मवेशियों को बना रहता है खतरा

लगातार कटनी व उसकी अन्य सहायक नदियों में फेंके जा रहे कचरे से नदियों का जल लगातार दूषित हो रहा है। कई मवेशी व जिले से सटे हुए जंगली जानवर भी इन नदियों पर निर्भर रहते है। ऐसे में नदियों में फेंके जा रहे कचरे से आने वालें दिनों में प्रदूषण और अधिक बढने से मवेशियों व जंगली जानवरों की मौत भी हो सकती है। जगह-जगह कचरा जमा होने की स्थिति व जल के प्रवाह में अवरोध होने से कटनी व उसकी सहायक नदियों का जल सिमट कर कुछ ही हिस्सें तक सीमित हो सकता है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को प्रदूषण नियंत्रण के नियम 1974 की धारा 33 क के तहत नोटिस भेजा है। जिसमें यह कहा गया है कि नगर निगम द्वारा दूषित जल उपचार संयत्र की स्थापना की जाए जिससे नदियों का जल प्रदूषित होने से बच सके वही नदियों व अन्य स्थानों में पड़ी रहने वाली पालीथिन को एसीसी कैमोर द्वारा ईधन के तौर पर उपयोग किया जाता है। जिसमें एएसी द्वारा 1 रुपये 75 पैसे में पालिथिन को खरीद कर फैक्ट्री में उच्च तापमान में जलाया जाता है जिससे जहरीली गैस का प्रभाव कम हो जाए इससे कोयले की बचत होती है व पालीथिन का सार्थक उपयोग भी होता है। यह कार्य निरंतर जारी है। शहर में व उसकी सहायक नदियों के साथ ही कटनी नदी में भी समय के साथ-साथ सुधार होगा व नदियों के प्रदूषण के साथ ही शहर से कचरा दूर होगा नदियों का जल भी दूषित होने से बचे यह प्रयास रहेगा।

पीआर देव, उपक्षेत्रीय अधिकारी, मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल कटनी



Source: Nai Dunia (Dated 26 Mar 2014)