SUBJECT :Solar Energy 

भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में क्रास लिनियर कन्सन्ट्रेट सोलर पावर पर आधारित 30 किलोवाट का सौर तापीय संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। नई टेक्नोलॉजी पर आधारित यह दुनिया का पहला सोलर पॉवर प्लांट होगा। इसकी मदद से विवि सूर्य की किरणों को कलेक्ट कर कन्सन्ट्रेट करेगा, जिसका उपयोग पानी को गर्म करने में किया जाएगा। इस गर्म पानी से जो भाप बनेगी, उससे टरबाइन चलाई जाएगी। केंद्र सरकार के नवीन एवं नव करणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट की मंजूरी विवि को दे दी है। विवि अगले एक साल के अंदर इस प्रोजेक्ट को शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

इस परियोजना के अंतर्गत 1 मेगावाट क्षमता का प्लांट विकसित किया जाएगा। यह तकनीक, ताप विद्युत परियोजना में कोयले के विकल्प के रूप  में  विकसित की जा रही है । पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आरजीपीवी परिसर में स्थापित किए जा रहे इस प्लांट का उपयोग प्राथमिक रूप से विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं व विभिन्न विभागों में लगे एयरकंडीशनर को चलाने में किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में सफलता मिलने पर विवि इस तकनीक का उपयोग देश के अन्य पॉवर प्लांट में करने की सिफारिश करेगा। यह परियोजना आरजीपीवी, नवीन एवं नव करणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा जापान सरकार के सहयोग से शुरू की गई है। इसमें भारत के कुछ अन्य शिक्षण संस्थान व उद्योग भी सहयोग कर रहे हैं।

प्रोजेक्ट की लागत 9.70 करोड़ रुपएइस परियोजना की कुल लागत 9.70 करोड़ रुपए है । परियोजना के लिए नवीन एवं नव करणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 2.24 करोड़ रुपए, सोलर लेम टोक्यो जापान द्वारा 4.14 करोड़ रुपए, इंडस्ट्री पार्टनर द्वारा 75 लाख रुपए दिए गए हैं। बाकी की राशि आरजीपीवी द्वारा वहन की जा रही है।

अगले एक साल में स्थापित करने की तैयारी: कुलपति प्रो. पीयूष त्रिवेदी का कहना है कि विश्व का यह पहला संयंत्र आरजीपीवी को अपारंपरिक ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान देने के साथ ही नए शोध एवं अभिनव प्रयोगों के लिए छात्रों को अवसर प्रदान करेगा। इस प्रोजेक्ट को स्थापित करने के लिए भारत सरकार ने विवि को दो साल का समय दिया है लेकिन विवि इसे अगले एक साल में ही स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। कुलपति के अनुसार यह परियोजना उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के आपसी समन्वय का एक बेमिसाल उदाहरण है।

भारत और जापान के उद्योग भी जुड़े हैं प्रोजेक्ट से: इस प्रोजेक्ट से भारत एवं जापान के विश्वविद्यालयों के अलावा भारत एवं जापान के तीन बड़े उद्योग जुड़े हुए हैं। इस परियोजना के दौरान शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं के लिए दोनों देशों के बीच एकेडमिक एक्सचेंज प्रोग्राम के कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। परियोजना के प्रमुख इन्वेस्टीगेटर संचालक यूआईटी आरजीपीवी प्रो.वीके सेठी, सहायक इन्वेस्टीगेटर टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी जापान के प्रो. वाया तमूरा, बर्गन सोलर पॉवर एवं एनर्जी लिमिटेड गुडग़ांव के प्रो. राजेन्द्र कुमार कोरा तथा आरजीपीवी के प्रोफेसर डॉ. मुकेश पाण्डेय हैं।


Source: Dainik Bhasker (Dated 9 Feb 2014)