SUBJECT :Lake Festival 

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि नई जल-संरचनाएं बनाने के साथ पुरानी जल-संरचनाओं को सहेजना जरूरी है। जल से जुड़े देशज ज्ञान को संभालने और बढ़ाने की जरूरत है। जल-संरचनाओं से जुड़े इस अभियान में आमजन को जागरूक कर जोड़ना होगा। मुख्यमंत्री चौहान शुक्रवार को राजधानी में झील महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। चौहान ने कहा कि अपने तालाब, बावड़ी और कुओं को बचाने के लिये समाज सरकार के साथ खड़ा हो। समाज में जागरूकता आए ये बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा पुरानी जल-संरचनाओं को बचाने के साथ नयी संरचनाओं का सृजन भी जरूरी है। उन्होंने तालाबों और अन्य जल संरचनाओं से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिये गये हैं। बुंदेलखंड में तालाबों को नदी से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। जल संरचनाओं के महत्व के प्रति समाज और आमजन को जागरूक करना होगा। चौहान ने कहा कि जल-स्तर का नीचे जाना, पानी की कमी आसन्न संकट की तरह है। इसे पहचानने की जरूरत है। अब पानी के लिये तीसरे विश्व युद्ध की बातें कही जाने लगी हैं। उन्होंने कहा कि ह्यआओ बनायें मध्यप्रदेश अभियानह्ण में जल-संरक्षण से आमजन को जोड़ने की विशेष पहल की जा रही है। नगरीय प्रशासन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जल-संरचनाएं हमारी संस्कृति और परम्परा से जुड़ी हैं। जल संरचनाएं अपनी पहचान खो रही हैं। यह समाज के लिये एक चुनौती है। इनके संरक्षण का दायित्व हम सबका है। जल, जंगल और जमीन जीवन के आधार हैं। मुख्य सचिव अन्टोनी डिसा ने कहा कि तालाबों और झील से पर्यावरण संतुलित रहता है। ये जैव विविधता और जीव जगत के केंद्र हैं। प्रदेश में एप्को द्वारा 150 तालाब को बचाने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए लोगों को जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। आरंभ में स्वागत भाषण अपर मुख्य सचिव मदन मोहन उपाध्याय ने दिया। उन्होंने कहा कि नदी, तालाब, झीलों का संरक्षण हमारे लिए प्राथमिक है। इन कुदरती स्रोतों को बचाना जरूरी है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में जापान के पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. नाकामोरा, डॉ. अशोक खोसला सहित भारत तथा विभिन्न देश के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।



Source: Peoples Samachar (Dated 15 Feb 2014)