SUBJECT :Wild Life 

भोपाल मध्यप्रदेश में 2013 में एक दर्जन बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं, लेकिन वन विभाग लापरवाही की नींद में सोया हुआ है। हालात यह हैं कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने बाघों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) के गठन का प्रस्ताव 11 अगस्त 2009 में दिया था, लेकिन लगभग पांच साल बाद भी प्रदेश में इसका गठन नहीं हो पाया है। यहां तो यह भी तय नहीं हो पाया है कि एसटीपीएफ के लिए स्टाफ की भर्ती कैसे की जाए। 26 दिसंबर 2012 को जब कटनी के पास बिजली के करंट से बाघ की मौत हुई थी, तब जाकर विभाग की नींद खुली थी। गुरुवार को वन मंत्री डॉ. गौरी शंकर शेजवार द्वारा इस संबंध में सवाल किया गया, तो वह बगले झांकते नजर आए और कुछ देर बाद कहा कि नियमानुसार स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन कर लिया जाएगा। मंत्री से प्रदेश में करंट लगाकर मारे जा रहे बाघों की मौत का सिलसिला रोकने के लिए जंगलों से गुजरने वाली बिजली की लाइनों को इंशुलेटेड किए जाने के संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर कहा कि अभी इस संबंध में सरकार के पास कोई योजना नहीं है। वहीं, प्रदेश में बाघों के अवैध शिकार को रोकने के लिए के संबंध में बात की गई, तो उन्होंने कहा कि सभी टाइगर रिजर्व में गश्ती दल निरंतर बाघों की निगरानी कर रहे हैं। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व में बसे गांवों को भी विस्थापित किया जाएगा। उन्होंने गुजरात के गिर से एशियाई शेर लाने के भी संकेत दिए हैं और इस बार प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ने का भी अनुमान है। मंत्री का दावा कि है कि मप्र को टाइगर स्टेट का दर्जा मिलेगा। लेकिन आए दिन बाघों के अवैध शिकार के चलते नहीं लगता की ऐसा कैसे हो पाएगा।



Source: Peoples Samachar (Dated 31 Jan 2014)