SUBJECT :River Pollution 

जबलपुर। सोचिए पवित्र नर्मदा में सीधे बजबजाती गंदगी मिल रही है और प्रशासन खामोश है। यह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है। बोर्ड ने इस मामले में जबलपुर, भेड़ाघाट और मंडला के नगरीय निकाय को नोटिस भेजा है। जिसमें पूछा गया है कि अब तक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट क्यों नहीं बनाया?

याद रहे कि अमरकंटक से आलीराजपुर के बीच मध्यप्रदेश के 18 निकाय से होकर नर्मदा नदी गुजरती है। दुखद बात तो ये है हर जगह नाले का पानी नदी में सीधे मिल रहा है। वो तो गनीमत है कि नर्मदा की पवित्रता को गंदगी ने अब तक उतना प्रभावित नहीं किया है, लेकिन यूं ही चला तो नर्मदा को मैली होने से कोई नहीं बचा पाएगा।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक घरों से निकलने वाला दूषित जल-मल नालों के जरिए सीधे नर्मदा में प्रवाहित किया जा रहा है। जबलपुर में गौर नदी में पहले से डेयरियों की गंदगी मिल रही है, जो आगे नर्मदा में मिलती है। बोर्ड ने नवंबर में मंडला और भेड़ाघाट नगर निकायों को पहले ही नोटिस देकर जवाब मांगा है। इसके अलावा विगत 24 जनवरी को नगर निगम जबलपुर को अध्यक्ष प्रदूषण निंयत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस दिया गए है। सभी को सीधे शहर का गंदा पानी नर्मदा में मिलाने की वजह पूछी गई है। इसके अलावा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाए जाने का कारण बताने को कहा गया है।

क्या है एसटीपी

सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) नालों का गंदा पानी इसमें पहुंचता है जहां पानी का ट्रीटमेंट कर गदंगी को साफ किया जाता है। उसके बाद पानी नदी में छोड़ा जाता है। इससे प्रदूषण नहीं होता है।

तेज प्रवाह से सुरक्षित

लंबे समय से नर्मदा में गदंगी मिलने के बावजूद अब तक उसमें अधिक प्रदूषण नहीं हो पाने के पीछे प्रमुख वजह उसका प्रवाह तेज होना है। यही यदि दूसरी नदियां होती तो शायद इसका हाल भी यमुना और गंगा नदी की तरह होता।

नर्मदा नदी में मंडला, भेडाघाट और जबलपुर में सीधे गंदा पानी मिल रहा है। एसटीपी लगाने के लिए बोला गया है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। एमपी पटेल, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड   


Source: Nai Dunia (Dated 2 Feb 2014)