SUBJECT :Water Pollution 

भोपाल मंडीदीप में फैक्ट्रियों के कारण भूमि, वायु और जलीय प्रदूषण ने जहां रहवासियों का जीना दुष्वार कर दिया है, वहीं प्रदूषण के कारण बेतवा नदी का पानी भी काला पड़ने लगा है, साथ ही मिट्टी भी अपना रंग बदलने लगी है। इसी को देखते हुए पर्यावरण विद् डॉ. सुभाष सी पांडे ने मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल की राजधानी स्थित जोनल बैंच के समक्ष याचिका पेश की है। जिस पर जस्टिस दलीप सिंह और विषय विशेषज्ञ सदस्य वीएस राव की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश दलीलों को सुनने के बाद याचिका को सुनवाई में स्वीकार करते हुए संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। वहीं, आगामी सुनवाई दिनांक तक अपना पक्ष रखने के लिए आदेश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 3 मार्च को होगी।


इनको जारी हुए नोटिस

याचिका को सुनवाई में स्वीकार करते हुए एनजीटी ने यूनियन ऑफ़ इंडिया के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, संस्कृति विभाग, भारत सरकार, केंद्रीय पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नई दिल्ली, मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल भोपाल, मप्र राज्य पर्यावरण निर्धारण मूल्यांकन प्राधिकरण भोपाल, मप्र औद्योगिक केंद्र विकास निगम, नपा मंडीदीप, मप्र हाउसिंग बोर्ड और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को नोटिस जारी किए गए हैं।

रहवासी क्षेत्रों के नजदीक फैक्ट्रियां

याचिका में कहा गया है कि औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप में करीब 275 छोटे-बड़े कारखाने हैं, जिनमें

19 प्लास्टि, 13 दवाओं और करीब दो दर्जन कारखाने रसायनों के हैं। ये कारखाने रहवासी इलाकों के नजदीक ही नहीं, बल्कि बीचोंबीच हैं। रहवासी क्षेत्रों से कारखानों की दूरी करीब 50 से 100 मीटर है। रेलवे स्टेशन भी अति नजदीक है। उन्होंने बताया कि रहवासी क्षेत्रों के अति नजदीक होने के कारण लोग घरों में बंद रहने मजबूर हैं। कारखानों से उठने वाले धुएं और डस्ट आदि प्रदूषण की वजह से तो वे खुले में खड़े हो पाते हैं, यहां तक कि महिलाएं मकान की छत और लॉन में कपड़े तक नहीं सुखा पा रही हैं।

जल, जमीन और जानों को खतरा

याचिकाकर्ता डॉ. सुभाष सी पांडे ने एनजीटी के समक्ष पेश याचिका में कहा है कि मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में जिस तेजी के साथ प्रदूषण फैल रहा है, उससे जल, जमीन और अनगिनत जानों को भारी खतरा उत्पन्न हो गया है।

कचरा निष्पादन के मंडीदीप नपा ने नहीं किए इंतजाम

याचिका में कहा गया है कि नगर पालिका परिषद मंडीदीप द्वारा औद्योगिक और घरेलू ठोस अपशिष्ट कचरा निष्पादन के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इससे ठोस अपशिष्टों का निष्पादन उचित तरीके से नहीं हो पा रहा है, जिसका विपरीत असर क्षेत्र के जल, जमीन, लोगों और निरीह भोलेभाले पशु-पक्षियों के जीवन पर पड़ रहा है।

यूनियन कार्बाइड से बड़ी त्रासदी का खतरा

याचिका में कहा गया है कि रहवासी इलाके के बीचों-बीच संचालित प्लास्टिक, दवा और रसायनों के कारखानों में खतरनाक कैमिकल और गैसों का उपयोग किया जाता है, जो मानव जीवन के लिए बहुत घातक है। इसके अलावा यदि कभी गैस लीक या अन्य प्राकृतिक और अप्राकृतिक दुर्घटना होती है, तो नगरवासियों को राजधानी की यूनियन कार्बाइड से बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है। डॉ. पांडे ने बताया कि नियम के अनुसार कारखाने रहवासी क्षेत्रों से कम से कम आधा किलोमीटर की दूरी पर होने चाहिए।

बेतवा नदी को खतरा

याचिका में कहा गया है कि कारखानों से निकलने वाले खतरनाक ठोस अवशिष्टों को नियम और गाइड लाइन की अवहेलना करते हुए केवल सड़क और कारखाना परिसर में खुले में जलाया जाता है, बल्कि सार्वजनिक नदी नालों में बहा दिया जाता है। वहीं कारखानों से निकलने वाले अति प्रदूषित खतरनाक कैमिकल युक्त पानी को सीधे बेतवा नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे जहां नदी का पानी तेजी से प्रदूषित हो रहा है, वहीं आसपास के खेतों की मिट्टी भी तेजी से प्रदूषण के शिकंजे में चुकी है। कैमिकलयुक्त जहरीले पानी की चपेट में आने से फसलें भी जलने लगी हैं।


Source: Peoples Samachar (Dated 22 Jan 2014)