SUBJECT :Wild Life Conservation 

जबलपुर। कान्हा और पेंच नेशनल पार्क के आसपास बने रिसोर्ट के संचालक मोटी कमाई की लालच में पर्यावरण के साथ ही वन्य जीवों को भी नुकसान पहुंचा रहे रहे हैं। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल पार्को के आसपास नियम विरूद्ध संचालित 15 रिसोर्ट संचालकों को नोटिस दिए हैं। संभाग के तीन जिलों में पचास से अधिक रिसोर्ट संचालित हो रहे हैं। 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार कान्हा और पेंच नेशनल पार्क की सीमा से लगे तीन जिलों में 64 रिसोर्ट संचालित हो रहे हैं। इनमें मंडला के 22, बालाघाट के 20 तथा सिवनी के 22 रिसोर्ट शामिल हैं। इनमें 15 रिसोर्ट संचालकों ने समय सीमा निकलने के बाद प्रदूषण बोर्ड से अनुमति ली नहीं है। वहीं मार्च 2014 में 11 रिसोर्ट की एनओसी समाप्त होने वाली है। अब तक संचालकों ने आवेदन नहीं किया है। वहीं 10 दस नए रिसोर्ट के लिए संचालकों ने एनओसी के लिए आवेदन दे रखा है। 

नेशनल पार्क के आस-पास रिसोर्ट खोलने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संचालन की अनुमति लेना अनिवार्य है। प्रदूषण बोर्ड द्वारा रिसोर्ट से निकलने वाले पानी और होने वाले ध्वनि प्रदूषण के लिए अनुमति लेनी होती है। 

 ये है नियम

1.     रिसोर्ट में बाहरी साज-सज्जा और अधिक उजाले के लिए लाइटिंग नहीं की जा सकती।

2.    रिसोर्ट से निकलने वाले गंदे पानी को बिना ट्रीटमेंट किए बाहर नहीं छोड़ा जा सकता है।

3.    डीजल से चलने वाले वाहनों से पार्क के आस-पास परिवहन पूर्णत: प्रतिबंधित रहता है।

4.    डीजे या 65 डेसीबल से तेज आवाज का साउंड नहीं बजाया जा सकता।



जानवरों को नुकसान

1.     लाइटिंग के कारण जानवर मार्ग भटक जाते हैं, साथ ही इंसानों पर हमला कर सकते हैं।

2.    डीजे, साउंड से पक्षियों और जानवरों की दिनचर्या में खलल पैदा होता है।

3.    रिसोर्ट से निकले गंदे पानी को पीकर पशु-पक्षी बीमार हो सकते हैं।

4.    डीजल वाहनों वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं, इससे अभ्यारण्य का वातावरण दूषित होता है।

कान्हा और पेंच नेशनल पार्क में 64 रिसोर्ट संचालित हैं। इसमें 15 की एनओसी समाप्त हो चुकी है। कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। एमएल पटैल, क्षेत्रीय प्रबंधक, मप्र प्रदूष्ण नियंत्रण बोर्ड 


Source: Patrika Newspaper (Dated 23 Jan 2014)