जैविक सम्पदा से सम्पन्न देश के दो अति महत्वपूर्ण क्षेत्र पश्चिमी घाट और उत्तर पूर्व के मध्य में स्थित ''मध्य प्रदेश'' जैविक सम्पदा के खज़ाने से समृद्ध है। प्रदेश में इलाकों (इको सिस्टम) की अच्छी खासी विविधता है, बीहड़, पठार, वनों, 9 राष्ट्रीय उद्यानों, 25 वन्यप्राणी अभ्यारण्यों सहित यह बाघ प्रदेश, वनस्पतियों एवं जीव जन्तुओं की विविधता से सम्पन्न है। लगभग 5000 प्रजातियां के पौधों, 500 प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा होने के अतिरिक्त यहां के जलाशयों में लगभग 180 प्रजातियों की मछलियां भी पाई जाती है। यही नहीं, यहां के खेतों में पैदा की जाने वाली सैकड़ों तरह की धान की किस्में और कई तरह के मोटे अनाज भी विद्यमान है। देशज पशु और कड़कनाथ जैसी विशेष प्रजाति के मुर्गे सब मिला कर कृषि जैवविविधता की सम्पन्नता को दर्शाते हैं। विशेष रीति रिवाजों, जीवन शैली और वैविध्यपूर्ण संस्कृति को संजोए हुए कई जनजाति समूह यहां बसते है। जैविक सम्पदा की यही विविधता आजीविका को ठोस आधार देते हुए आबादी के एक बड़े हिस्से को खाद्यान्न सुरक्षा उपलब्ध कराती है। लगभग 1000 से अधिक औषधीय पौंधो से जुड़ा पारम्परिक ज्ञान ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करता है। यहां की परम्पराएं, रीति रिवाज, त्यौहार और पारम्परिक ज्ञान जैविक सम्पदा की निरंतरता एवं संरक्षण को महत्वपूर्ण दिशा प्रदान करते है। राज्य की समृद्ध जैवविविधता आजीविका को समृद्ध करने, जैवप्रौद्योगिकी के विकास, खाद्यान्न और आजीविका को मजबूत करने के लिए अद्वितीय अवसर प्रदान करने की क्षमता रखती है।



Source: मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड