भारत के ह्रदय स्थल के रूप में स्थित मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता विशेषकर वन एवं वन्यप्राणियों की विविधता के लिये जाना जाता है । मृदा और जल के संरक्षक के रूप में वनों की महत्ता अद्वितीय है । मध्यप्रदेश की विभिन्न पर्वत श्रृंखलाएं एवं उनका जलग्रहण क्षेत्र वनाच्छादित होने के कारण ही कृषि एवं कृषि पर आधारित जनसंख्या का पोषण कर पाती है । यहां उष्ण कटिबंधीय शुष्क, पतझड वाले सागौन, मिश्रित तथा साल के वन है । मंडला, डिण्डोरी, शहडोल तथा बालाघाट में साल वन हैं चंबल क्षेत्र ग्वालियर, शिवपुरी, भिण्ड तथा दतिया में करधई तथा झाडीदार वन है, शेष क्षेत्र में बहुमूल्य सागौन वन है । वनों से लकडी के अलावा बांस एवं प्रचुर मात्रा में विभिन्न प्रकार की लघुवनों एवं औषधीय मिलती है । प्रदेश औषधीय पौधों के समृद्ध संसाधनों से भी परिपूर्ण है । चूंकि वनों में तथा वनों की सीमा के आस-पास रहने वाले आदिवासी एवं अन्य ग्रामीण जनता का बहुत बडा भाग वनों पर निर्भर है

मध्य प्रदेश में संरक्षित क्षेत्र

मध्यप्रदेश में आरक्षित एवं संरक्षित वन







Source: वन विभाग, मध्य प्रदेश